आज 14 नवंबर 2025 है और मैं आज आपसे बात करने वाला हूँ एक ऐसी फिल्म के बारे में जो पुराने जमाने, बड़े सेट्स और बड़े विवादों से भरी है — हाँ, मैं बात कर रहा हूँ ‘Kaantha’ की।
कहानी क्या है ‘Kaantha’ की?
Kaantha’ 1950 के दशक के मद्रास (अब चेन्नई) के फिल्म-स्टूडियो की पृष्ठभूमि में बनी एक पीरियड ड्रामा है।
मुख्य किरदार हैं:
Ayya, एक प्रतिष्ठित निर्देशक (Samuthirakani)
T. K. महादेवन (Mahadevan), अभिनेता (दुलकर सलमान)
कुमारी (Bhagyashri Borse), हीरोइन जिसे Ayya बड़े ध्यान से चुनता है।
इसके अलावा Rana Daggubati भी अहम भूमिका में हैं।
प्लॉट कुछ यूँ है: Ayya अपनी पुरानी अधूरी फिल्म “Shaantha” को दोबारा बनाना चाहता है। लेकिन महादेवन का अहंकार (ego) कहानी में तूफान ले आता है — वह फिल्म का नाम बदलकर “Kaantha” कर देता है और सेट पर नियंत्रण पाने की कोशिश करता है।
बाद में कहानी थ्रिलर में बदल जाती है — सेट पर एक मर्डर होता है और सवाल खड़े होते हैं कि किसने हत्या की, क्यों, और किसके लिए ये सब हुआ।
एक्टिंग और Director का अनुभव
दुलकर सलमान की एक्टिंग को बहुत तारीफ मिल रही है — कई लोग इसे उनकी “करियर-बेस्ट” कह रहे हैं।
Samuthirakani (Ayya) भी अपने किरदार में बेहद भरोसे-लायक लगते हैं — उनका रूप, उनकी आवाज़, सब कुछ बहुत संतुलित है।
Bhagyashri Borse ने कुमारी की भूमिका में नाजुक और मजबूत दोनों भावों को बहुत खूबसूरती से निभाया है।
Rana Daggubati की उपस्थिति भी अहम है, खासकर क्लाइमेक्स-सीन में उनकी भूमिका चर्चा में है।
निर्देशक Selvamani Selvaraj ने 1950-60 के मद्रास का सेट बहुत मेहनत से दोबारा तैयार किया है — सेट डिज़ाइन, वक्त की लड़खड़ाती दुनिया और कैमरा वर्क सब मिलकर एक यथार्थ-अनुभव देते हैं।
क्या खूब है और क्या कमज़ोर
क्या अच्छा है:
पुरानी फिल्मों का जादू: ‘Kaantha’ आपको उन दिनों के स्टूडियो की दुनिया में ले जाती है।
अहंकार और कला का गहरा संघर्ष: निर्देशक और अभिनेता के बीच की टकराहट कहानी को मज़बूती देती है।
तकनीकी पक्ष मजबूत है: सेट, सिनेमैटोग्राफी और म्यूज़िक — सब मिलकर एक बड़े पैमाने की फिल्म जैसा अनुभव देते हैं।
क्लाइमैक्स और हत्या-मिस्ट्री: दूसरे हाफ में थ्रिलर एंगल कहानी को और भी दिलचस्प बनाता है।
कमियाँ:
कहानी की गति धीमी है: कुछ रिव्यू के अनुसार दूसरा भाग थोड़ा खींचा हुआ महसूस होता है।
मर्डर मिस्ट्री में क्लियर मोटीव नहीं मिला: जैसे कि सबमिशन और सस्पेंस थोड़ा कम पावरफुल रहता है।
सॉन्ग्स उतने यादगार नहीं: Technically म्यूज़िक सही है, लेकिन गाने बहुत ज़्यादा दिल को नहीं छूते।
विवाद ज़रूर है — ये जानना भी ज़रूरी है
इस फिल्म के बीच एक बड़ा विवाद भी सामने आया है — M. K. Thyagaraja Bhagavathar के पोते ने कोर्ट में याचिका दायर की है, कहा कि फिल्म उनके दादा को गलत रूप में पेश कर रही है।
हालाँकि निर्माताओं ने कहा है कि “Kaantha” बायोपिक नहीं है, बल्कि एक फिक्शनल कहानी है जो उस युग की फिल्म इंडस्ट्री, अहंकार और कला की दुनिया से प्रेरित है।
यह पक्ष कहानी में और गहराई जोड़ता है, और दर्शकों को ये सोचने पर मजबूर करता है कि “कलाकारी, स्टारडम और पब्लिक इमेज” के बीच असली संतुलन क्या है।
मेरी राय — देखें या नहीं?
दोस्तों, मेरी राय में Kaantha देखना एक अच्छा विकल्प है, अगर आप:
पुराने जमाने की फ़िल्म-इंडस्ट्री का जादू पसंद करते हैं
महान कलाकारों का संघर्ष और अहंकार देखने में रुचि रखते हैं
कभी-कभी थ्रिलर के साथ थोड़ा धीमा ड्रामा भी सह सकते हैं
लेकिन अगर आप फुल-एक्शन या हाई-स्पीड मिस्ट्री के बड़े प्रशंसक हैं, तो हो सकता है कि यह पूरी तरह आपकी उम्मीदों पर खरा न उतरे।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ‘Kaantha’ यह सिर्फ एक फिल्म नहीं है — एक अनुभव है। यह हमें ले जाती है 1950-के मद्रास की चमक-दमक और सिनेमा की जटिलता में। दुलकर सलमान, Samuthirakani और Bhagyashri की एक्टिंग इसे और मजबूती देती है, और तकनीकी तौर पर यह वाकई दिल को छूने वाला है। हां, थोड़ा धीमा हिस्सा और मिस्ट्री क्लैरिटी की कमी कुछ लोगों को रोक सकती है, लेकिन मुझे लगता है कि यह उनके लिए भी देखने लायक है जो पुराने ज़माने की कला, स्टूडियो ड्रामा और फिल्म-इंडस्ट्री के अंदर की राजनीति में रूचि रखते हैं।